Mistari 200 ya kwanza.
NETFLIX ओरिजिनल फ़िल्म
1881, बंगाल प्रेसीडेंसी, भारत
अरे! फूल क्यों फ़ेंके? आ जा!
बुलबुल!
बुलबुल!
बुलबुल!
बुलबुल!
कहाँ मर गई!
पकड़ लिया!
फिर पेड़ों पे!
ये कौन है, पिशी माँ!
थोड़ी मैली है।
पर काम चला लेंगे।
अरे!
ठीक ही तो कह रहा है।
फिर से तैयार करना पड़ेगा।
पिशी माँ, बिछुए क्यों पहनते हैं?
क्योंकि यहाँ पर एक नस होती है...
-...उसे दबाओ नहीं ना, -आह!
तो लड़की उड़ जाती है।
चिड़िया के जैसे?
नहीं...वश में करने के लिए होते हैं, बिछुए!
-पिशी माँ! -हम्म!
वश क्या होता है?
पिशी माँ!
बाबा! पिशी माँ!
क्या कर रही है, पागल!
बेचारी घबरा गई होगी, भाभी!
पिशी माँ!
कहानी सुनोगी?
डरावनी कहानी है?
हम्म!
सुनुंगी
बहुत समय पहले की बात है।
एक चुड़ैल थी।
पेड़ों पे रहती थी...
...घने जंगलों में।
उल्टे पैर थे, उसके!
ख़ून की प्यासी थी।
...और वो ताक में बैठी रहती थी।
कब राजकुमारी घर आए...
...और वो उसे...खा जाए।
गुड़िया
महेंद्र!
मना किया था ना, यहाँ आने से!
गुड़िया!
बिनोदिनी!
पति है आपका! नज़र तो रख ही सकते हो, इसपे!
माफ़ करना, बड़े ठाकुर!
महेंद्र...
...हमारा भाई...
...बच्चा है।
वो कहाँ है?
कौन?
जिससे मेरी शादी हुई थी।
वो तो हम हैं।
नहीं!
वो तो मेरे जितना था।
वो मेरे साथ पालकी में आया था।
जिसने मुझसे कहानी सुनाई थी।
उसका नाम...
...सत्या था।
बड़ी हो जाओगी तो समझ जाओगी...
...पति और देवर में क्या अंतर होता है।
20 साल बाद
धीरे चलाओ!
माफ़ कीजिए सत्या ठाकुर...
ये जगह ठीक नहीं है।
यहाँ ख़तरा है।
यहाँ वो है।
कौन?
चुड़ैल!
आप जाग गए सत्या बाबू?
सो जाइए, बड़ी हवेली आएगी तो मैं जगा दूंगा!
भाभी...सो गईं?
जी, छोटा ठाकुर!
- खाना लगवा दें? - नहीं, नहीं, ठीक है, अब
- -
नाराज़ मत होइए, माँ!
नाराज़ तो मैं हो चुकी।
अब तुम्हारी पहली पत्नी क्या करेगी?
दोनों साथ में, बहनों की तरह रहेंगी।
दफ़ा हो!
अगर इसे ज़रा भी तकलीफ़ हुई, तो तुम्हारी ख़ैर नहीं!
ठाकुर-ठाकुर खेल रहे हो, भाभी?
एक
दो
तीन
चार
पाँच
छ:
सात...आठ
नौ
दस
ग्यारह...बारह
-तेरह - फिर क्या हुआ?
चौदह। फिर चुड़ैल ने राजकुमारे के कमरे की सारी मोमबत्तियां
...बुझा दी
बुद्धू!
फिर?
फिर दबे पाँव, चुड़ैल राजकुमारी के बिस्तर के पास आ गई...
- ...और -
कैसे आना हुआ?
ओह...अपनी ज़ायदाद का मुआयना करने आए हो?
भाभी!
पाँच साल से कोई ख़बर नहीं,
एकदम से मेरी याद तो नहीं आई होगी!
हम्म?
भाभी हमने,
ठाकुर दादा को बहुत सारी चिट्ठियाँ लिखी।
हमेशा आपके बारे में पूछते थे।
कभी कोई जवाब मिला नहीं!
तीन साल पहले ही आना चाहता था।
महेंद्र दादा के.. .
...मारे जाने के वक़्त।
कहते हैं कि,
चुड़ैल ने मारा, उन्हें!
आप भी ऐसी बातों पर यक़ीन करती हैं?
मैं कहाँ?
वो तो बिनोदिनी दीदी कहती है।
इन पाँच सालों में कितना कुछ बदल गया ना, भाभी!
ठाकुर दादा भी घर छोड़कर चले गए।
क्या हो गया, ये?
बिनोदिनी दीदी से मिलोगे?
बिनोदिनी भाभी!
छोटू दादा!
देवी माँ ने अच्छा नहीं किया हमारे साथ।
क्या दीदी?
हाथ में जपमाला है और भगवान को कोस रही हो?
जप करके भी शांति कहाँ?
सारी उम्र पूजा- पाठ में लगा दी...
...फिर भी देखो?
क्या फल मिला?
पूजा के दिन ही खा गई चुड़ैल, महेंद्र को।
- -
अब तो कोई भी मरता है बुख़ार से या पेड़ से गिरके भी...
तो लोग, चुड़ैल के नाम कर देते हैं, मौत। है ना!
अरे!
बुख़ार था, महेन्द्र को?
खून से लथपथ पड़े हुए थे।
देखा था आपने।
भाभी!
मुझे लगता है, किसी जानवर का काम है।
इंद्रनील दादा नहीं बताते थे, एक...
...एक शेर जो आदमख़ोर हो गया था, कुछ साल पहले।
उल्टे पैरों के निशान थे...
...खून वाले!
चुड़ैल ही थी।
फिर वही चुड़ैल!
भाभी, आज तक नहीं आई।
अचानक से कहाँ से आ जाएगी?
पेड़ों से!
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