The first 200 lines.
-दिखाओ कितना है दम! -चलो, यारो! मैं कर सकता हूँ।
हा-हा, ज़रा भी दर्द नहीं हुआ।
-हा-हा! बोन्स, कोई असर न हुआ! -ऐ! मुझ सा दूजा नहीं!
अब तुम्हारी शामत आई!
ठीक है, चलो इसे करते हैं।
तुम मुझे नहीं पकड़ सकते!
हाँ, भाग जाओ!
अरे!
-मेरे रास्ते से हटो! -सँभालकर!
सँभलकर।
बाल-बाल बचे।
बस इतना ही दम है?
हेलो, दोस्त। कहा था लौटकर आऊँगा।
वाह।
ट्रक!
-मेरे रास्ते में न आओ, गधो! -ऐ!
-यारो, इसे देखो! -वाह, बहुत खूब!
हाँ! विजेता का ट्रक।
यह आज हो रहा है?
आज क्या हो रहा है?
फ़र्डीनेंड, तुम्हें कुछ नहीं पता?
उस ट्रक के आने का अर्थ, मैटोडोर साँड़ लेकर जाएगा।
तुम्हारे विचार से कौन होगा?
बेवकूफ़, मेरे पापा।
मेरे सींग आने पर मेरी बारी आएगी।
पूरे स्पेन से लोग मुझे देखने आते हैं, महान वैलिएंटे!
आज तक का सबसे प्रचंड साँड़।
मैं इसे धूल चटाकर रहूँगा। आदमी बनाम साँड़।
क्या वह सुंदर नज़ारा होगा? नहीं।
क्या वह बढ़िया होगा? अरे हाँ!
भीड़ पगला जाएगी, मैं चैंपियन बन जाऊँगा।
बाकी का सारा जीवन राजा की तरह बिताऊँगा।
सपने देखते रहो, वैलिएंटे।
चयन तो मेरा होगा।
विजेता वाली मुस्कान का अभ्यास भी शुरू कर दिया।
ऐ, मैटाडोर आ गया!
कहाँ? कहाँ? अरे नहीं।
मुझे उल्टी आ रही है। ओह, माँ।
-गुआपो, कोई मैटाडोर नहीं है। -क्या?
डरपोक कहीं का।
गुआपो, भूल जाओ। वह मुझे लेकर जाएगा।
मेरे जैसा तेज़, उग्र साँड़ और कोई नहीं।
इतना तेज़ हूँ, आते हुए दिखाई भी नहीं देता।
-बोन्स? -हाँ?
तुम्हारा चयन कभी न होगा। वजह पता है?
वह क्या है?
क्योंकि तुम बस हड्डियों का ढाँचा हो, बोन्स।
तुम ठीक हो?
मुझे तुम्हारी मदद नहीं चाहिए, भोंदू। मैं ठीक हूँ!
सँभालकर।
ओह, फ़र्डीनेंड, क्या बात है?
कुछ नहीं।
"कुछ नहीं।"
ऐ! तुम लोगों को और सिर नहीं टकराने?
न, इस तरह ज़्यादा मज़ा आता है।
इसकी बात का यकीन करोगे? मैटाडोर साँड़ चुनेगा...
और इसे बेकार के फूल की चिंता है।
मत करो, वैलिएंटे!
रोककर दिखाओ।
लड़ाई! लड़ाई! लड़ाई! लड़ाई!
वैलिएंटे, मैं तुमसे लड़ाई नहीं करूँगा।
अरे, फूल साँड़ डर गया।
मैं डरा नहीं हूँ।
तो फिर लड़ो। साँड़ यही तो करते हैं।
चाहो तो मुझे मार लो, पर फूल से दूर रहो।
तुम उससे चुपचाप मार खा लोगे?
क्या? इसमें कोई मज़ा नहीं।
जाने दो। अपने बेकार के फूल को दिल से लगाकर रखो।
बड़े साँड़ जा रहे हैं।
फ़र्डीनैंड, शुभकामनाएँ दो।
शुभकामनाएँ, पापा।
उनके छक्के छुड़ा दो, पापा!
चलो, यारो, उन्हें वहाँ से देखते हैं।
मेरे रास्ते से हटो!
जाओ, साँड़ो!
क्या कहने!
वह मैटाडोर है। वह चयन करेगा!
मुझे चक्कर आ रहे हैं। लगता है गिरने वाला हूँ।
पापा, अगली बार आप जीतेंगे।
तुमसे किसने पूछा?
तुम क्या देख रहे हो?
फ़र्डीनेंड!
तो, तुम यहाँ हो!
मेरा चयन हो गया। यकीन करोगे?
तुम्हारे पापा सम्मान के लिए अखाड़े में लड़ेगे।
जाना ज़रूरी है?
हाँ, बेशक जाना ज़रूरी है। चलो, फ़र्ड।
यह हर साँड़ का सपना होता है, है न?
शायद।
मेरा सपना न हो तो चलेगा?
खैर...
देखो, फ़र्ड, तुम अभी बच्चे हो।
बड़े होने पर सपने बदल जाते हैं।
सबकुछ बदल जाता है।
एक चीज़ जो पक्के तौर पर बदलेगी...
वह यह कि तुम अपने पिता से ज़्यादा विशाल और सख्तजान होगे।
-हो ही नहीं सकता। -बिलकुल होगा।
हाँ। फिर देखना...
तुम अखाड़े में उतरोगे और चैंपियन बनोगे।
क्या मैं बिना लड़े चैंपियन बन सकता हूँ?
ओह, फ़र्डीनेंड।
काश दुनिया की ऐसी रवायत होती।
पर हमारे लिए वैसा नहीं है।
आई बात समझ में?
ठीक है, वक्त हो गया है।
आप लौटकर आएँगे, है न?
क्या? उस मैटाडोर की मेरे आगे कोई बिसात नहीं, ठीक?
ठीक है।
मैं जीतकर आऊँगा और अपने सारे पैंतरे दिखाऊँगा।
अपने खास गुप्त पैंतरे भी।
पापा!
पापा।
मैंने कहा था।
वह साँड़ नरमदिल था।
और नरमदिल हमेशा हारते हैं।
बेहतर होगा कमर कस लो।
ओह, ऐ, तुम यहाँ क्या कर रहे हो?
चलो। वापस चलो, चलो। स्टाल को लौटो।
चलो, छुटकू राम।
एक बछड़ा बाहर निकल गया! उसे पकड़ो!
उसे पकड़ो!
ठीक है।
ठीक है।
हेलो।
डरो मत, छोटे साहब।
तुम्हें फूल पसंद हैं?
मैं तुम्हारा अच्छा खयाल रखूँगी।
आओ।
अब यह तुम्हारा घर है।
जाओ। ठीक है।
नीना
ठीक है, तुम्हारी बारी।
फ़र्डीनेंड
मेरा अच्छा बच्चा कौन है? तुम मेरे अच्छे बच्चे हो।
ऐ, मुझे लगा मैं अच्छा बच्चा था।
गुड नाइट, फ़र्डीनेंड।
फ़र्डीनेंड!
गुड नाइट, फ़र्डीनेंड।
होर्हे, जागो, दोस्त।
ओए, होर्हे, उठ जा! चलो चलें!
कानों में संगीत की तरह मिश्री घोलता है। मधुर है।
सींगों के भीतर तक छू जाता है।
ऐ, पाको!
पाको!
पाक-अटैक। ऐ, कुत्ते मियाँ।
बड़े दिन को लेकर खुश हो?
खुश? तुमने मुझे कभी खुश देखा है?
देखो, एक बुरी खबर है।
तुम्हें यहीं टोक दूँ।
आज कोई बुरी खबर नहीं क्योंकि आज पुष्प महोत्सव दिवस है।
साल का एकमात्र बढ़िया दिन।
अच्छा, यह बात है।
-इस साल... -बस रुक जाओ।
ऐ, मरिया। पंख फड़फड़ाने के लिए तैयार हो?
ऐ। मुर्गियों को अभी दड़बे में भेजा है।
छोड़ दिया।
मरिया?
ओह, नहीं। मरिया?
-बधाई हो। मरिया को सूरज पर भेज दिया। -मरिया!
ओह, बहुत खूब, मरिया।
कौन कहता है मुर्गा उड़ नहीं सकता।
कुदरत का कानून कहता है। मैं कहता हूँ।
-मुर्गे मुर्गे ही रहेंगे। -हो गया शुरू।
-कुत्ते कुत्ते ही रहेंगे... -साँड़ साँड़ ही होते हैं।
हाँ। सही। सामान्य बात।
अगर मैं आम साँड़ होता तो इस फ़ार्म में कभी न आता।
और हम भाई-भाई न होते।
कुत्ता और साँड़ भाई नहीं हो सकते। बहुत अजीबोगरीब बात होगी।
सच? तो मेरे भाई, जब तुम्हें भाई कहता हूँ तब दुम क्यों हिलती है?
ऐ। बंद करो।
लगता है अजीब नया सामान्य है।
चलो, कहीं हमें छोड़कर न चले जाएँ।
फ़र्डीनेंड, रुको!
मैं यही बताने की कोशिश कर रहा था।
तुम यहाँ हो।
चलने के लिए तैयार हो?
माफ़ करना, नीना। इस साल फ़र्डीनेंड उत्सव में न जा सकेगा।
पर वह हर साल जाता है।
पता है, वह अब छोटा बछड़ा नहीं रहा।
फिर मैं भी नहीं जाऊँगी।
सुनो, जान। यह उसके हित में है।
पर, पापा। यह फ़र्डीनेंड ही तो है।
फ़ार्म के बाहर वे उसे वैसे नहीं पहचानते।
माफ़ करना, छोटे साहब।
मैं तुम्हारे लिए शहर का सबसे सुंदर गुलदस्ता लाऊँगी। ठीक?
ऐ, दिल छोटा न करो, दोस्त।
वैसे भी फूलों को ज़्यादा ही महत्त्व देते हैं!
मुझे पैसे दो तब भी वहाँ न जाऊँ।
ऐ। क्यों न पाको को ले चलें? मज़ा आएगा, है न?
शायद।
मैं इससे खुश नहीं हूँ। ज़रा भी नहीं।
बहुत बेतुकी बात है।
मैं छोटा बछड़ा नहीं रहा, तो क्या?
ज़्यादा प्यार कर सकते हैं।
और फिर, बड़ा साँड़, ज़्यादा बड़ी मदद।
मैं जा रहा हूँ।
नहीं। नहीं, नहीं। हुआन ने मना किया।
हुआन ने मना किया, मैं नहीं जा रहा। तय रहा।
पर नीना मेरे बगैर परेशान होगी। उसे मेरी ज़रूरत है।
जाना है, रुकना है। जाना। रुकना। जाना।
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