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A Commentary by Mkvcinemas

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Published on: 2023-11-26
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The first 200 lines.

माइक चेक, माइक चेक।

दि ग्रेट इंडियन फॅमिली

अरे माइक को ढोलक के पास लाओ ना थोड़ा।

अरे जनता आ गई है शुरू करते हैं, भाई।

जय कन्हैया लाल की।

शहरों में शहर है हमारा बलरामपुर।

और बलरामपुर के फेवरेट हैं, हम।

हमारी लाइफ में अगर पिक्चर बनती ना, तो यह उसका पहला शॉट होता।

लेकिन लाइफ हो या पिक्चर, दोनों में बैक स्टोरी बहुत ज़रुरी होती है।

और हमारी बैक स्टोरी शुरू होती है, न्यूटन बाबा से।

बाबा सो रहे थे। सर पे सेब गिरा,जग गए..

अरे बाबा सेब गिरा था धो, पोंछ के खा लेते। लेकिन नहीं,

आप तो ऐसे जागे कि पूरे ब्रह्मांड के बच्चों का जीवन नष्ट कर गए।

लेयो ग्रेविटी, खाओ ग्रेविटी। अरे पागल हैं क्या हम।

जिसको समझ में आये वो तेज बालक,

जो ना समझे वो चौपट बालक,

और जो बिना समझे समझने की एक्टिंग करे

वो होता है आदर्श बालक,

यानी वेद व्यास त्रिपाठी यानी बिल्लु यानी हम।

उस दिन हम भी एक पेड़ के नीचे बैठे थे

और हमारे लाइफ की थ्योरी हमारे सर पे इतनी जोर से गिरने वाली थी कि क्या बताएं,

लेकिन हमको पता नहीं था उस टाइम

क्यूंकि हम सांप सीढ़ी खेल रहे थे।

हमारा पसंदीदा गेम था। और एक दम से...

हम भी खेलें तुम्हारे साथ?

जीवन सफल हो गया यार।

रोज़ सुबह 7 बज कर 55 मिनिट पे

ऐश्वर्या मालपानी रोल नंबर 23 के दर्शन प्राप्त होते थे,

अब सेब काहे गिरता है वह हमको नहीं पता

लेकिन ये पता है कि सदियों से रिक्शॉ पे बैठने वाले लड़कों का दिल,

गाड़ी वाली लड़कियों पर ही गिरता है।

आज हमारे पसंदीदा गेम सांप सीढी ने हमारे जीवन में अमृत घोल दिया।

अरे.. हम दोनों तो एक ही घर में आ गए।

आय लव सांप सीढ़ी।

आज मेरा बर्थडे है।

यहाँ नहीं। तुम घर पे आना।

मेरे पापा ने पार्टी रखी है।

वैसे मेरे पापा बिजनेसमैन है।

और तुम्हारे पापा क्या करते हैं?

हम चाह कर भी बोल नहीं पाये कि हमारे पापाजी की जीवनी है पूजा पाठ।

महादेवाय नमः

श्री गणेशाय नमः

पंडित सियाराम त्रिपाठी।

बलरामपुर के पुश्तैनी पंडित हैं।

और चूँकि - जन्म, मृत्यु और शादी में एक ही चीज कॉमन है - वो है पंडित।

इसलिए इनकी डिमांड और इज्जत दोनों नं 1 है।

और इनसे जलने वालों में नं.1 हैं पंडित जगन्नाथ मिश्र

उर्फ़ मुँह में राम बगल में छुरी।

ये पण्डिताई को धरम कम और धंधा ज्यादा समझते हैं।

पापा जी जैसे धर्मराज युधिष्ठिर

और मिश्रजी धूर्त जैसे दुर्योधन।

आमने सामने तो भाई जैसा व्यवहार हैं

लेकिन एक न एक दिन महाभारत तो होगी जरूर।

और इन सबसे दूर हमारे लाइफ की महाभारत यहाँ खेली जा रही थी।

इस घर का नाम है 'प्रभु लीला भवन'।

नाम पहले दादा-दादी का था लेकिन अब घर का है।

हर इंडिया घर के पूर्वज की तरह

ये भी साल में एक ही बार पूजे जाते हैं।

और आज फ्रेश गेंदे की माला देख कर यह भी अचंभित हैं,

कि यार ऑकेजन क्या है?

वैसे यही सवाल हमारे मन में भी था।

गूंजा ?

गूंजा त्रिपाठी। हमारी जुड़वाँ बहन

और साँप सीढ़ी में वो 7 नंबर पे छोटा वाला सांप होता है ना। सेम।

बुआ! बिल्लू आ गया।

आओ...आओ...आओ मेरे लाल आओ.. आओ.. वाह वाह

बुआ,नाम तो सुशीला कुमारी था लेकिन जगत बुआ के नाम से प्रसिद्ध।

यह उठो लाल अब आँखें खोलो टाइप के वात्सल्य रस से लेकर,

ऐ चार चप्पल लगाएँगे तक के वीर रस तक का फासला दो सेकंड में तय करती हैं।

ठीक से लगाओ सीधा-सीधा।

अरे कहाँ रह गये भाई?

जिज्जी !! तुम हमें कभी तैयार मत होने देना।

हेमा त्रिपाठी उर्फ चाची,

चाची का नाम तो वैसे हेमा मालिनी के चक्कर में पड़ा था

और चाची भी कन्विंस्ड थी कि एक झलक तो है उनमें।

हेमा जल्दी आओ..

आई...

कौन सी पूजा है आज

हम्म.. तुम्हें बताया नहीं ?

किसने?

चाचा उर्फ़ बालकराम त्रिपाठी।

अपनी माइण्ड की पिक्चर के ये मुकद्दर के सिकन्दर थे।

और आज एक बार फिर यह मेन बात भूल गए और याद रहा सिर्फ मिठाई का आर्डर।

अरे मक्खी बिठाने का एक्स्ट्रा ले रहे हो क्या रामसरूप?

उसी का तो टेस्ट है भैय्या।

- हा..हा..हा.. तुम्हारी यहीं बातें ना.. - चलें... बाँध दे एक-एक किलो सब..?

अरे तीन-तीन किलो.. बिल्लू का प्रोग्राम है आज।

शायद मक्खियों को सिक्स सेंस होता है

और उन्हें पता था कि हमारा क्या प्रोग्राम बनने वाला है।

- जनेऊ। - यज्ञोपवी संस्कार।

तुम्हारा ब्राह्मण बनने का हैप्पी बर्थडे।

घने हैं बहुत। टाइम लगेगा

- यह क्या है ? - मुण्डन होगा ना पहले।

हमें तो ऐश्वर्या के घर पार्टी में जाना है।

हैप्पी बर्थडे, ऐश्वर्या

बिल्लू भाग क्यों रहे हो?

बिल्लू रुक जाओ... बिल्लू चार चप्पल मारेंगे रुको

अरे नहीं करवाना है।

कहाँ चली सवारी मास्टर ?

पापाजी। बिना मुण्डन के भी तो जनेऊ हो सकता है।

परसों हमने मिश्राजी के लौंडे तुलसीदास का भी कार्यक्रम किया है। पिटिर पिटिर कर रहा था।

मिश्राजी ने दो कानताप दिए और पाँच मिनट में मुंडन।

यह मिश्राजी का घर नहीं है।

​यहाँ सभ्य लोग रहते हैं।

अगर बच्चे के दिल में कोई प्रश्न है तो उसका उत्तर देना आवश्यक है।

जी।

डेमोक्रेसी!

पापाजी का रामबंध। जब भी कोई निर्णय लेना हो, तो इनका अमोघ अस्त्र प्रजातंत्र।

- तो शुरू करें? - जी।

अब पूरा परिवार जनेऊ के मुद्दे पर वोट करेगा

और डिसिशन फाइनल।

होम पार्लियामेंट के सामने प्रस्ताव था

कि बिल्लू का मुण्डन होगा या नहीं?

रिजल्ट हमारे सामने है।

पक्ष में एक,

दो,

तीन,

चार,

पांच, (कुल्ह) और छे।

जग जग जिया सु ललनवा,

भवनवा के भाग जगल हो,

ललना लाल हुई है,

मनवा में आस जगल हो

जग जग जिया सु ललनवा,

और उस समय हमको ये क्लियर हो गया

कि हमारे फेवरेट गेम लाइफ हमारे साथ खेल रही थी,

फर्क सिर्फ ये था की इस गेम में हम गोटी थे

और हमारी फॅमिली सांप।

ये लो ये पहनो। भैय्या पहुँच गए होंगे।

बोल के गए हैं आज तो पूजा पे तुम भी बैठोगे,

पूरे पंडित हो गए हो बेटा। अब जजमानी शुरू करो।

हमने भी सोचा टोपी पहन के ऐश्वर्य की पार्टी में कौन जायेगा

उससे अच्छा पूजा पे ही चले जाते हैं यार धोती वोती पहन के।

मैया की चुनर लहरायए

तो सुख की हवा चली,

जय माता दी

देवी भवन जब आये

तो सारी बला टली

भैय्या कहते हैं पूजा के समय वस्त्र नहीं ह्रदय दिखना चाहिए।

उतारो कुरता।

आज बेटी ऐश्वर्या के जन्मदिन की शुभकामना के लिए ...

पूजा के साथ हम अपनी कामनायें...

अब हमें क्या पता था कि ऐश्वर्या के फादर मि. मालपानी बड़े धार्मिक टाइप के हैं

और अपनी बेटी की बर्थडे पे उन्होंने पूजा का भी आयोजन किया है,

ऐसा कौन करता है यार,

लेकिन अब आ गये थे और बेइज़्ज़त भी हो गए।

भजन में बहुत शक्ति होती है..

अगर हम सच्चे दिल से ईश्वर को याद करते हैं तो हमारी मनोकामना अवश्य पूरी होती है।

उस टाइम हमको लगा कि हमारी समस्या का समाधान है तो भगवान के पास ही।

भजन के द्वारा ईश्वर को याद करेंगे।

और हमारी फरियाद भी अब उन्हीं को सुननी पड़ेगी,

मन में था तो बहुत कुछ पर पता नहीं क्या हुआ

कि एक आवाज़ बिलकुल अंदर से बहुत ज़ोर से आई।

होऊ सिरजनहार,

जग के पालनहार,

तोरे बिना ये जीवन यात्रा

मोहे मझधार लगे

होऊ अपरमपार

दुखियों के सरकार,

थमे जो बढ़ के पतवार तू,

ये नैय्या पार लगे

ये नैय्या पार लगे

खड़ा हूँ दर पे,

तू कोरी चुनरिया में, थोड़ी सी लाली भर दे,

दुहाई है तुझे,

तू सारी अमवासों को, मेरी दिवाली कर दे

जनम से मै एक, अवगुण का पुतला,

तू मेरे सब दोष गुण में बदल दे,

माथे पे मंडरा रही है आपदाएं,

जो भी हर ले..

पुकारूँ हरी ॐ ओम/ॐ हरी ॐ ॐ, हरी ॐ ओम/ॐ सुन ले

पुकारूँ हरी ॐ ओम/ॐ हरी ॐ ॐ, हरी ॐ ओम/ॐ सुन ले

पुकारूँ हरी ॐ

पुकारूँ हरी ॐ

पुकारूँ हरी ॐ, हरी ॐ, हरी ॐ

जब हमने आँखे खोली तो हमें उम्मीद थी कि दुनिया बदल चुकी होगी,

हमारी सांप रुपी फॅमिली बदल चुकी होगी।

लेकिन भगवान का सेंस ऑफ़ ह्यूमर भी बड़ा रिस्की होता है गुरु।

वरदान... वरदान... वरदान है पण्डितजी आपका बेटा..

ऐश्वर्या.. प्रणाम करो बेटा.. प्रणाम करो..

जय हो

अब आप समझे हमारी बैक स्टोरी।

गाओ बेटा... गाओ..

और उस दिन जो हमने गाना शुरू किया तो आज तक रुके नहीं।

कम्युनिकेशन डायरेक्ट चल रहा है तब से ले के आज तक

जय कन्हैया लाल की।

और बिल्लू के सपनों की राख से पैदा हुआ “भजन कुमार”

प्रणाम, प्रणाम मेरे भक्तों। मेरे भक्त तो नहीं कन्हैय्या के भक्तों प्रणाम प्रणाम।

पै लागी माजी।

बच्चों को यहाँ पर साउंड सिस्टम से दूर रखे

आर यू रेडी, 3 गो।

हो दे दे दर्शन फिर एक बार

द्वारे आया भजन कुमार

हो दे दे दर्शन फिर एक बार

द्वारे आया भजन कुमार

कष्ट से उद्धार कर दे

आज बेडा पार कर दे

ज़िन्दगी सरल और ऊंचे विचार कर दे

फ़ॉलोअर तेरे सारे

मिलके तुझे पुकारें

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