لومړۍ 186 کرښې.
सभी किरदार, किरदारों के नाम, जगहों के नाम, इमारतों के नाम, इस्तेमाल की गई संपत्तियां,
दिए गए नाम, अवास्तविक और काल्पनिक हैं। किसी भी स्थान, व्यक्ति, संपत्ति आदि से इनकी
कोई भी समानता महज संयोग है और ये निरुद्देश्य है।
शराब और नशीले पदार्थ का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
यह फ़िल्म किसी भी तरह से शराब या नशीले पदार्थ के इस्तेमाल या सेवन का प्रचार या प्रशंसा नहीं करती है
श्री राकेश मारिया का विशेष आभार
श्री दया नायक [पुलिस इंस्पेक्टर, आतंकवाद निरोधक दस्ता, मुंबई, महाराष्ट्र] का विशेष आभार
12 मार्च 1993 बॉम्बे
-हैलो? -अरे तुम अभी तक ऑफ़िस में हो?
मैं कब से तुम्हारा वेट कर रही हूँ।
अरे, इतनी क्या जल्दी है तुम्हें?
वैसे तो तुम मुझे फ़ोन नहीं करती, लेकिन आज बेटा आ रहा है तो तीन-तीन बार!
-बस निकल ही रहा हूँ मैं। -अच्छा।
ईएमएम घड़ियाली एंड संस
मारुति एमएच 02 बी 6971
कितनी देर लगा दी तुमने!
-ठीक है। -चलो अभी।
आपको पता है न, घर में और कितने काम बाक़ी हैं।
क्यों परेशान हो रही हो? जानता हूँ, तुम वीर को बहुत मिस करती हो।
अब कुछ दिन यहीं हमारे पास रहेगा वो।
12 मार्च 1993…
मुंबई में 12 अलग जगहों पर बम ब्लास्ट्स हुए,
पहली बार देश ने ऐसा आतंकी हमला देखा।
और इन ब्लास्ट्स ने मुंबई पुलिस और आम आदमी को
उस चीज़ से वाकिफ़ करवाया जिसने हिंदुस्तान को हिला कर रख दिया,
आरडीएक्स!
मुंबई पुलिस इस केस पर दिन-रात काम करती रही।
और जिस ऑफ़िसर ने कई संदिग्धों को गिरफ़्तार करके सिर्फ़ 48 घंटों में इस केस को सुलझाया,
वो थे इंस्पेक्टर कबीर श्रॉफ़।
मगर, सर, सुनने में आ रहा है, इस ब्लास्ट के पीछे मास्टरमाइंड,
बिलाल अहमद और टाइगर इंडिया छोड़ के जा चुके हैं।
पत्रकार की ये ख़बर बिल्कुल सही थी।
ब्लास्ट से दो दिन पहले टाइगर और बिलाल देश छोड़ के भाग चुके थे।
टाइगर ईरान चला गया।
और बिलाल अहमद, पीओके,
ओमार हफ़ीज़ के पास।
ओमार हफ़ीज़ आईएसआई के सारे ग़ैर क़ानूनी काम करता था।
और '93 ब्लास्ट के बम्बर्स को बारूद बनाने का प्रशिक्षण भी ओमार के ज़रिए ही दिया या थी।
हमने ये भी सुना है कि मुंबई में 1000 किलो आरडीएक्स लाया गया था,
जिसमें से सीरियल ब्लास्ट में सिर्फ़ 400 किलो उपयोग हुआ है
और 600 किलो अब भी गायब है।
क्या ये जानकारी सही है?
किसी को नहीं पता था कि ये जानकारी सच थी या एक अफ़वाह।
मगर सिर्फ़ कबीर श्रॉफ़ जानता था
कि वो 600 किलो आरडीएक्स इंडिया में ही कहीं दफ़न है।
और उसे दफ़न करने वाला कोई और नहीं… बिलाल अहमद है।
बिलाल, आज से आप हमारे साथ रहेंगे।
1999 में ओमार ने आईएसआई की मदद से आतंकवादी संगठन,
लश्कर की शुरुआत की।
और बदले में आईएसआई ने उन्हें कारगिल की जंग में इस्तेमाल किया।
मगर जंग के दौरान ओमार का बड़ा बेटा,
इमाद हफ़ीज़, इंडियन आर्मी के हाथों मारा गया।
इमाद की मौत की ख़बर सुनकर ओमार के छोटे बेटे रियाज़ और रज़ा,
लंदन से अपनी पढ़ाई छोड़कर फ़ौरन मुज़फ़्फ़राबाद लौट आए।
ये हमारे आसपास हर जगह मौजूद थे, और कोई भी हो सकते थे।
अब्बा, अब हम वापस नहीं जाएंगे।
पाक सेना
मैं आप से वादा करता हूँ, भाभी,
कि सरहद पार कोई भी महफ़ूज़ नहीं रह पाएगा।
मार्च 2007
एक हफ़्ते बाद मोहाली में इंडिया और पाकिस्तान का क्रिकेट मैच है।
और आप सभी का इंडिया जाने के लिए दो दिन का वीज़ा जारी किया जा चुका है।
आप सब इंडिया जाएंगे ज़रूर, पर कभी वापस नहीं लौटेंगे।
वहाँ मेरा एक दोस्त है, कादर उस्मानी,
उसने आप सबके लिए अलग-अलग शहर में रहने और काम करने का इंतज़ाम किया है।
थे तो ये सारे पाकिस्तानी,
लेकिन इंडिया में हिंदुस्तानी पहचान के साथ आम आदमी की तरह ज़िंदगी बिता रहे थे।
ये हमारे आस-पास हर जगह मौजूद थे और कोई भी हो सकते थे।
शायद आपकी बिल्डिंग का चौकीदार,
या फिर आपके ऑफ़िस में काम करने वाला एक कर्मचारी।
इन्हें पहचानना और पकड़ना पुलिस के लिए बहुत मुश्किल था,
क्योंकि जब तक इनका कमांडर इन्हें ऑर्डर ना दे
तब तक ये किसी को कोई तकलीफ़ नहीं पहुंचाते थे।
आज के बाद आपका सिर्फ़ एक ही संपर्क होगा,
आपका एरिया कमांडर इन चीफ़, रियाज़।
ओमार के सबसे वफ़ादार बॉडीगार्ड, बशीर का बेटा मुख्तार भी
रियाज़ का साया बनकर हिंदुस्तान जा रहा था।
और इस तरह शुरुआत हुई लश्कर के स्लीपर सेल की।
मैंने और रज़ा चाचू ने…
अपनी ज़िंदगी के सबसे बेहतरीन साल लंदन यूनिवर्सिटी में गुज़ारे हैं।
अब तो तुम भी वहाँ पढ़ने जा रहे हो।
खूब मन लगाकर पढ़ना।
वैसे भी अब यहाँ बहुत कुछ होने वाला है।
तुम फ़िक्र मत करना।
रज़ा, अम्मी और अब्बू का ख्याल रखना।
क्या सोच रही हो?
सोच रही हूँ, कि ये सब कब ख़त्म होगा।
ये सोचना चाहिए कि इसकी शुरुआत कहाँ से हुई।
साठ साल पहले कुछ जाहिल और सियासत के लालची लोगों ने
मज़हब के नाम पर बंटवारा किया।
उसकी सज़ा मिली हम जैसे लोगों को।
खानदान को धक्के मार के अपने घर से,
अपने मुल्क से निकाल दिया गया।
पांच साल के बच्चे के सामने,
उसके वालिद का गला काट दिया गया, उसकी अम्मी की जान ले ली,
उसकी बहन के साथ…
यहाँ आने के बाद भी लोगों ने
उसे सिर्फ़ मुहाजिर ही कहा।
वो पांच साल का बच्चा मैं था।
मगर ये सब करके…
-ये सब करके क्या हासिल होगा? -क़ुर्बानी तो देनी पड़ेगी।
वरना हम में और उन सियासतदानों में क्या फ़र्क!
हिंदुस्तान ने मेरी किस्मत बदली।
अब मैं हिंदुस्तान की किस्मत पलट दूंगा।
"आँख के बदले आँख ली तो पूरी दुनिया अंधी हो जाएगी।"
अगर हमारे बुज़ुर्गों ने इस बात पर अमल किया होता
तो उनकी ग़लतियों का हर्ज़ाना आज हमें नहीं भरना पड़ता।
सूर्यवंशी
जी, कबीर सर?
- सीएम सर तुम्हारे साथ हैं? -हाँ, सीएम सर साथ में ही हैं।
- फ़ोन दो। -सर, जॉइंट सीपी कबीर श्रॉफ़।
हम्म।
हाँ, कबीर?
सर, तीन घंटे से आपको फ़ोन करने की कोशिश कर रहा हूँ।
वो मैं फ़्लाइट में था, बोलो क्या काम है?
कुछ ज़रूरी बात करनी थी आपसे, अभी मिलने आ सकता हूँ?
असल में, मैं रास्ते में ही हूँ। मैं आ जाता हूँ एटीएस मुख्यालय।
आतंकवाद निरोधक दस्ता मुख्यालय (मुंबई)
कबीर, जब-जब मुझे आतंकवाद निरोधक दस्ते से आधी रात को फ़ोन आया,
अगली चार रातें मैं ठीक से सो नहीं पाया हूँ।
इस बार भी हम आपकी उम्मीद पर खरे उतरेंगे, सर।
रियाज़ हफ़ीज़ का पता चल गया है।
क़रीब 15 सालों से ये 40 स्लीपर एजेंट इंडिया में छुप कर रह रहे हैं।
छानबीन के बाद पता चला कि ये जो दो संदिग्ध मारे गए
वो किसी राजबीर राथोड़ नाम के होटेलियर से मिलने
अक्सर जैसलमेर जाया करते थे।
ये है राजबीर राथोड़, सर।
ये राजबीर राथोड़ और कोई नहीं, लश्कर चीफ़ ओमार हफ़ीज़ का बेटा है।
रियाज़ हफ़ीज़।
फ़ौरन अपनी टीम जैसलमेर भेजो। और उस कमीने को गिरफ़्तार कर लो।
माफ़ी चाहूंगा, सर, पर अनुमति लेने के लिए रुकने का वक़्त नहीं था।
-टीम पहले ही जैसलमेर के लिए निकल चुकी है। -हम्म।
और टीम का नेतृत्व कौन कर रहा है?
-सूर्यवंशी… वीर सूर्यवंशी। -वो पागल?
जैसलमेर - वायुसेना छावनी
- -
सूर्यवंशी!
वीटी - जेएसए पैंथर
सूर्यवंशी!
सूर्यवंशी!
सूर्यवंशी!
सूर्यवंशी!
- सर! -थैंक्स, बलवान।
सर, बलवान नहीं। सर, विवान।
हम्म।
इतने सालों में दो चीज़ें नहीं बदली, सर।
आपकी हेयरस्टाइल और नाम बोलने की आदत।
सर, वैसे हम एक बार रियाज़ को पकड़ेंगे न,
आपकी फ़ोटो फ्रंट पेज पर नक्की है, हाँ!
साला! फ़ोटो फ्रंट पेज पर तो आएगी पर मेडल के साथ या गले में हार के साथ,
ये तो भगवान ही बताएगा।
सामने देख रे, येड़े!
सर, येड़े नहीं, भिड़े।
-कैश बैंक भेज दिया? -जी, मैडम।
मुझे कहना ही होगा कि पूरे जैसलमेर में मैंने इतना अच्छा खाना नहीं खाया।
बहुत-बहुत शुक्रिया!
-आप यहाँ की मालिक हैं? -जी।
-ये रेस्टोरेंट मैं और मेरे पति चलाते हैं। -ओह, अच्छा।
राजबीर!
क्या हुआ?
ये कह रही हैं कि इन्हें हमारे रेस्टोरेंट का खाना बहुत पसंद आया।
-बहुत! -शुक्रिया।
उम्मीद करता हूँ आप दोबारा यहाँ ज़रूर आएंगी।
ज़रूर आऊंगी।
क्या मैं आप लोगों के साथ एक सेल्फ़ी ले सकती हूँ?
बिल्कुल!
- बहुत-बहुत शुक्रिया! - शुक्रिया!
सर, पक्का वही है।
-लोकल पुलिस को इत्तिला कर दो! -जी, सर।
-क्या लेंगे, सर? -बताता हूँ।
आरपीजी!
गोल्डन सिटी रेस्टोरेंट
राजस्थान पधारो म्हारे देश
भागो!
-विवान, कवर! -सर!
कैमल डेकोर
रेगिस्तान की निशानी
सूर्यवंशी!
सूर्यवंशी!
चलें, मुंबई? हाँ?
आतंकवाद निरोधक दस्ते की गोपनीय जगह
पुलिस
-ए, लाइट जलाओ, कीड़े! -सर, भिड़े।
सेंट्रल एजेंसी के हिसाब से, तुम लश्कर चीफ़ ओमार हफ़ीज़ के बेटे हो।
हम्म।
2007 में इंडिया-पाकिस्तान का क्रिकेट मैच देखने
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