Les 168 premières lignes.
इस फ़िल्म के निर्माता और इससे जुड़े सदस्य किसी भी व्यक्ति या समुदाय,
विशेष रूप से एलजीबीटीक्यूआई प्लस समुदाय, के विचारों या संबंधों, या यौन प्रवृत्ति
या भावनाओं को ठेस पहुँचाने, पूर्वाग्रह करने, आलोचना करने,
बदनाम करने का इरादा नहीं रखते हैं।
हर साल माता का जगराता करवाने वाले,
शांडिल्य परिवार लड़िया वाले का हम
ज़ोरदार तालियों से अभिनंदन करते हैं ये।
और ज़ेड ब्लैक अगरबत्ती वालों का बहुत-बहुत धन्यवाद,
जिन्होंने 50 फीट की माता रानी की प्रतिमा बनवाई।
पहली बार देख रहा हूँ सरदार शेर।
ओह!
सरदार सारे शेर ही होते हैं।
बकवास कर रहा है!
ज़ोरदार तालियों से स्वागत कीजिए…
माता के सच्चे भगत
और गज़ब के फनकार,
हमारे चिरंजीवी पर्सनल सुपुत्र
श्री करम कुमार मथुरा वाले का
ज़ोरदार तालियों से स्वागत।
जब आप लय सुनें, तो नाचना शुरू कर दें।
आज तुम्हारे बोलने पर साक्षात आए जागरण करने के लिए,
फिर भी लेट।
एंट्री मिस कर दी हमारी।
ज़रा सुनो…
आई लव यू।
आई लव यू टू।
बच्चे तो चार हैं मेरे,
लेकिन सच्चा प्यार आज तक नहीं मिला।
ये क्या कर रही हो, आंटी?
तुम्हारे इशारे तो मैं पहले ही समझ गई थी।
माता रानी ने आज मेरी सुन ली।
चलो भाग चलें।
नहीं, नहीं, तुम्हें इशारे नहीं कर रहा था मैं।
तो किसको कर रहे थे?
गर्लफ्रेंड हमारी।
धोखेबाज़!
हटना, बेटी।
क्या था ये सब?
पता नहीं।
आंटी कौन थीं?
मैंने तुम्हें बुलाया, वो आ गई।
अच्छा! सुनो।
-साल भर से ऊपर हो गया हमें मिले हुए। -पता है।
पापा से शादी की बात करोगे, या हम अखबार में छपवा दें?
अरे, कर लेंगे।
तुम्हारे पापा कहाँ मरे जा रहे हैं।
-हाँ? -मतलब भागे जा रहे हैं।
अच्छा, इधर आओ।
कोई देख लेगा।
-आओ ना। -क्या कर रहे हो, करम?
ये जागरण अचानक बंद कैसे हो गया?
हैलो।
एक सेकंड।
तुम अब तक सो रहे हो?
यहाँ कल रात हम सो नहीं पाए।
इतना मिस कर रही हो हमें?
मिस तो पापा कर रहे थे तुम्हें।
हमने पापा को सारी बात बता दी।
कब मिले, कब प्यार हुआ, वगैरह-वगैरह।
वगैरह-वगैरह में क्या-क्या बता दिया है?
हमारा दिमाग मत खराब करो।
पापा पहुँचने ही वाले होंगे तुम्हारे घर…
शादी की बात करने आ रहे हैं।
शादी की बात करने?
शादी की बात करने?
हाँ। कहके तो यही निकले थे।
बाकी का पता नहीं।
अब उठो और नाश्ते की तैयारी करो।
अरे जो बाप अपनी बेटी के ससुराल का पानी तक नहीं पीते ये उनमें से ना हैं?
भक। और सुनो।
काजू, किशमिश, बादाम, फ्रूट सब रखना नाश्ते में।
चने, मूँगफलियाँ मत रख दियो।
और हाँ, चाय एक जैसे कपों में रखना।
अलग-अलग रंगों की नहीं।
चना और सिंग तो बासी रखे हैं।
लगता है बहुत सालों से मरम्मत नहीं हुई है इसकी।
बहुत पुरानी हवेली लग रही है ये।
जी, जी।
हमारे बाप-दादा के ज़माने की है।
हमारे बेटे चिरंजीवी करम ने कितनी बार हमसे कही
कि पापा किसी आलीशान हवेली में शिफ्ट कर लो।
लेकिन हम ही नहीं माने।
-क्यों? -है ही नहीं।
ओह!
आज पैसा लेना है इससे।
-बहुत बेवकूफ़ बनाता है ये। -जगजीत जी…
-राधे-राधे। -राधे-राधे।
मेरे पैसे…
-दे देंगे। दे देंगे। -कब?
हमें कुछ जल्दी ना है।
अरे हम देने नहीं, लेने आए हैं।
एक रुपया नहीं मिलेगा।
पहले की उधारी पहले चुकाओ।
हम मेहमानों के सामने तुम्हारी बेइज़्ज़ती नहीं करना चाहते हैं। समझा करो यार।
चलो, चलो।
ये तो परी ने मुझसे रिक्वेस्ट की,
इसीलिए तुम्हारा ये घर देखने चला आया।
ना तो तुम कोई जॉब करते हो,
ना तुम्हारी कोई ज़मीन जायदाद है।
और बैंक बैलेंस के नाम पे तो नील बट्टे डबल सन्नाटा।
सोच कैसे लिया तुमने…
कि पापा की परी मिल जाएगी?
प्यार आपकी नज़र में कुछ नहीं है, अंकल?
कुछ नहीं।
सोचके बोलिए, रैपिड फायर थोड़ी खेल रहे हैं।
अच्छा।
सोचके बोलना है।
नहीं!
भैया ये कप के रंग अलग-अलग क्यों हैं?
ये कपों की रंगोली है, बेटा।
-अरे भैया, सुनो। -चलिए उठिए। उठिए।
-ये सब क्या है? पुलिस? -चलिए! कुर्सी छोड़िए!
-चलिए, क्या चल रहा है यहाँ पर? -पापा, ये कौन?
-ऐसे कैसे घुस गए? -क्या नाश्ता पानी चल रहा है?
तुमने जो इस घर के बदले चालीस लाख रुपए जो बैंक से लोन लिये थे ना,
पहले वो वापस देना, उसके बाद घर वापस आना। समझे।
चालीस लाख का फ्रॉड…
भाईसाहब, बात ऐसी है…
कि ये घर गिरवी रखके जो लोन लिया था,
वो तो करोना के ज़रूरतमंदों में बाँट दिया।
अच्छा?
मुझसे जो एक लाख रुपए लिये,
-वो भी करोना में बाँट दिया? -हाँ।
हमारे तो चाय के कप भी इन्होंने उधार ले रखे हैं।
अरे! अरे! रे!
दहेज की बात हो गई क्या?
दहेज की बात मत करो।
पुलिस के हवाले कर दूँगा।
अरे इसने कहा था कि आपकी बेटी के साथ जो दहेज आएगा…
उससे हमारा उधार वापस करेगा।
पूछो इनसे, कहा था कि नहीं कहा था?
रिश्ता? इस घर से?
जिनका कोई घर ही नहीं है!
अंकल, करोना के टाइम पर सारी दिक्कत हो गई।
उससे पहले पैसों की कोई प्रॉब्लम नहीं थी।
देखो, जगराता मातारानी का काम है।
नमन है।
लेकिन जगराता जॉब है?
ये जॉब है?
-आसान लगता है आपको जगराता करना? -हाँ…
मोहम्मद रफ़ी से मोहम्मद अज़ीज़ तक,
जगजीत सिंह से अरिजीत सिंह,
किसी ने जगराता नहीं किया।
इंटरनैशनली जस्टिन बीबर, शकीरा, बीटीएस
इतना टैलेंट नहीं है कि जगराता कर पाएँ।
करोड़ों रुपए लेकर दो-चार गाने गाना आसान है।
लेकिन 3100-3200 में 15-20 भजन, भेंटें,
मोहल्ले की औरतों को लेकर लेडीज़ डांस करना आसान नहीं होता, श्रीवास्तव साहब।
और चप्पल चोरी हो जाती है, वो अलग।
जगराता करने का आशीर्वाद मातारानी हम जैसे चंद किस्मत वालों को देती हैं।
नहीं जी… ऐसी महान किस्मत वाला दामाद नहीं चाहिए मुझे।
चलो।
सच्चा प्यार किया है आपकी बेटी से! सच्चा प्यार! ट्रू लव!
देखो! अच्छी नौकरी,
बैंक अकाउंट में पच्चीस-तीस लाख रुपए,
और स्वयं का घर।
ये अगर कर सकते हो,
तो करके दिखाओ छह महीने में।
बाद में बात करेंगे। चलो।
रोडीज़ चल रहा है यहाँ पर? टास्क दे रहे हो मुझे?
छह महीने में नौकरी नहीं मिलेगी, श्रीवास्तव साहब।
अरे ढूँढने से तो भगवान भी मिल जाते हैं।
तो हम भगवान को ढूँढ लेते हैं।
नहीं, आप रहने दीजिए।
जितनी आपकी उम्र है,
इस टाइम तो भगवान ढूँढ रहे होंगे आपको।
चल।
बासी चने और सिंग खाके ही पता चल गया था कि…
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